शिवप्रसाद शर्मा और हरीप्रसाद चौरसिया यह नाम किसी अन्य परिचय के मोहताज नही। इन दिग्गजों ने ‘शिव-हरी’ के नाम से हिंदी सिनेमा को संगीत दिया है। भले ही उन्होने चुनींदा फिल्मों को ही संगीत दिया, लेकीन उनके संगीत की मीठास कौन भुल सकता है? आज उन्ही का संगीतबध्द किया हुआ एक बहोत ही खूबसुरत एवम् प्यारा सा गीत आपके खिदमत मे पेश कर रहा हू। नब्बे के दशक के प्रारंभ मे आयी चांदनी फिल्म वैसे तो ‘लव्ह ट्रँगल’ के घिसेपीटे फॉर्म्युलेपर आधारित थी लेकीन, उसके संगीत की जादू अदभूत थी। उसी फिल्म का ‘‘तेरे मेरे ओठोंपर मीठे मीठे गीत मितवा’’ इस गीत का सौदर्य मन को लुभाता है। इस मे हरीप्रसादजीं की बांसुरी एवम् शिवजींका संतूर कुछ पलों के लिए ही आता है लेकीन वह जैसे गीत की आत्मा बन गया। इस के आखीर मे ‘देखा एक ख्वाब...’ की एक छोटी सी झलक अपने को सिलसिला के सपनों के दुनिया मे ले जाती है। इस गीत मे कोरस का बहोत ही बढिया उपयोग हुआ है। शब्दों के बीच या अनूठा कोरस अपने को रूमानी दुनिया मे ले जाता है। और इस खूबसूरत गीत को उसी के अनुरूप परदेपर लाया लाया गया है। इसिलिए आप इसे सुने या देखे आपको दोनो रूपो मे मजा जरूर आएगा। उसे अगर आप सुनते है तो संगीत का जादूई रूप आपके तन मन को झकझोर देगा। इसे अगर आप देखते है तो जैसे ‘सोने पे सुहागा’ ही है। गीत के मीठे बोल, ह्दय के तार झंकृत करनेवाला संगीत और रूपहली परदेपर का तिलिस्म....वाह क्या कहने!
तेरे मेरे ओठोपे मीठे मीठे गीत मितवा
आगे आगे चले हम पीछे पीछे प्रीत मितवा
पहले पहले प्यार की पहली रात याद रहेगी
फुलों से इस शहर की मुलाकात याद रहेगी...
काश यही सारी उमर, यू ही जाए बीत मितवा
आगे आगे चले हम पीछे पीछे प्रीत मितवा
अखियों मे तू बस जा, अखियॉं मै बंद कर लू
पहले इन अखियों से, बाते मै चंद कर लू...
तेरी इन ही बातों ने, लिया मुझे जीत मितवा
आगे आगे चले हम, पीछे पीछे प्रीत मितवा
छोटे छोटे दिन रात, लंबी लंबी बातें है
जल्दी है किस बात की, बडी मुलाकाते है....
बातों मुलाकातों में उमर जाए बीत मितवा
आगे आगे चले हम पीछे पीछे प्रीत मितवा
Sunday, July 19, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment